
‘‘इरशाद ख़ान सिकन्दर अपना अलग रास्ता चुनने की कोशिश में हैं। उसके मज़ामीन ज़मीन से जुड़े हैं और मौजूद की अक्कासी करते हैं। ख़याली महबूब से परे वो जीते-जागते लोगों से हमकलाम हैं।’’ - रफ़ी रज़ा ‘‘इरशाद की शायरी में घर भी है बाज़ार भी है। नौजवानी का ख़ुमार भी है और मुहब्बत में किसी का इन्तिज़ार भी है। ज़िन्दगी से वास्ते भी हैं और चहल-पहल करते हुए रास्ते भी हैं।’’ - शकील आज़मी ‘‘इरशाद ख़ान सिकन्दर ने अपने बयान को न फ़लसफ़ों से बोझिल करने की कोशिश की है न ऐसे अल्फ़ाज़ से जिसके लिए डिक्शनरी का सहारा लेना पड़ता है। ये मुकम्मल तौर पर ज़िन्दगी से जुड़ा इज़हारिया है जिसमें तासीर भी मौजूद है और तजरुबा भी।’’ - ज़ुल्फ़िक़ार आदिल (पाकिस्तान) ‘‘इरशाद की ग़ज़ल पाठक को ज़रा रुककर आराम से बैठने और सोचने पर मजबूर करती है। एक थके हुए ज़ेहन को सुकून देने का काम करती है और यही वजह है कि इस ग़ज़ल की उम्र लम्बी होगी।’’ - आदिल रज़ा मन्सूरी आँसुओं का तर्जुमा इरशाद ख़ान सिकन्दर की पहली किताब है जो अब नयी साज-सज्जा में हाज़िर है। इसके कई शे’र बहुत लोकप्रिय हुए जिन्हें अन्य लेखकों ने अपनी किताबों या लेखों में उद्धृत किया है। दूसरा इश्क़ इरशाद की दूसरी किताब भी शायरी के पाठकों के बीच बहुचर्चित है। 8 अगस्त 1983 को उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर ज़िले में जन्मे इरशाद ने अपना खास पाठक वर्ग तैयार कर लिया है। वे शायरी, कहानी और नाट्य लेखन के साथ-साथ सिनेमा जगत में बतौर गीतकार सक्रिय हैं। इनका संपर्क है: ik.sikandar@g,
| Brand Name | Rajpal |
| Manufacturer | Rajpal and Sons |
| Item Type | Poetry · Books |
| Shipping Weight | 180 g |
| Package Dimensions | 21.5 × 14.1 × 0.9 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction › Poetry |
| Category Rank | #416,040 in Books |
| Marketplace Rating | 4.5 out of 5 (15 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789389373127 |