
गंगा सहाय मीणा एक जाने-माने शिक्षाविद, मोटिवेशनल वक्ता और आदिवासी साहित्य पत्रिका के संस्थापक संपादक हैं। उनकी 6 पुस्तकें और सैंकडों आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने 100 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लिया है। वे विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित अपने संपादकीय लेखों और विभिन्न समाचार चैनलों पर समाचार बहसों में अपनी भागीदारी के लिए भी जाने जाते हैं। गंगा सहाय मीणा को दलित आदिवासी संवाद लेखन पुरस्कार 2011, रुक्मणी देवी युवा पुरस्कार 2017 और भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही वे राजस्थान साहित्य अकादमी के सदस्य रह चुके हैं। गंगा सहाय मीणा द्वारा लिखित पुस्तक 'आदिवासी चिंतन की भूमिका' हिन्दी में आदिवासी प्रश्न पर लिखी मौलिक व महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में विशिष्ट स्थान रखती है। इसमें 'आदिवासी' पद के अर्थ और संदर्भों से लेकर आदिवासी समाज की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा के साथ आदिवासी साहित्य की अवधारणा और विधावार प्रवृत्तियों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक के अंत में आदिवासी साहित्य संबंधी पुस्तकों की सूची भी दी गई है। आदिवासी जीवन, भाषा और साहित्य के इतने तत्वों को एक साथ समेटने के कारण यह किताब अपने प्रकाशन (2016) से ही आम पाठकों से लेकर आदिवासियों पर अध्ययन करने वाले अध्येताओं के बीच लोकप्रिय बनी हुई है। भारत सरकार की नई आर्थिक नीतियों ने आदिवासी शोषण–उत्पीड़न की प्रक्रिया तेज की, इसलिए इसका प्रतिरोध भी मुखर हुआ । शोषण और उसके प्रतिरोध का स्वरूप राष्ट्रीय था, इसलिए प्रतिरोध से निकली रचनात्मक उर्जा का स्वरूप भी राष्ट्रीय था । आदिवासी अस्मिता और अस्तित्व की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुई रचनात्मक उर्जा का नाम ही समकालीन आदिवासी साहित्य आंदोलन है । आदिवासी साहित्य अस्मिता की खोज, दिकुओं द्वारा किये गए और किये जा रहे शोषण के विभिन्न रूपों के उद्घाटन तथा आदिवासी अस्मिता और अस्तित्व के संकटों और उनके खिलाफ हो रहे प्रतिरोध का साहित्य है । यह उस परिवर्तनकामी चेतना का रचनात्मक हस्तक्षेप है जो देश के मूल निवासियों के वंशजों के प्रति किसी भी प्रकार के भेदभाव का पुरजोर विरोध करती है तथा उनके जल, जंगल, जमीन और जीवन को बचाने के हक में उनके ‘आत्मनिर्णय’ के अधिकार के साथ खड़ी होती है ।
| Brand Name | Ananya Prakashan |
| Manufacturer | Aanaya Prakashan |
| Item Type | Society & Culture · Books |
| Shipping Weight | 100 g |
| Package Dimensions | 20 × 14 × 4 cm |
| Category | Books › Society & Social Sciences › Society & Culture |
| Category Rank | #173,418 in Books |
| Marketplace Rating | 4.4 out of 5 (60 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789385450617 |