
यह इतिहास की पुस्तक नहीं है-इस अर्थ में कि सामान्यतः इतिहास में राजाओं, युद्धों और राजनैतिक उलट-फेरों का जैसा विवरण रहता है, वैसा इसमें नहीं है। इस पुस्तिका का वह प्रयोजन भी नहीं है, क्योंकि वह राजनैतिक इतिहास का विषय है। समाज की गतिशीलता में राजनैतिक प्रक्रिया अनेक प्रक्रियाओं में से एक है। समाज को विकासशील बनाने वाली अन्य महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है, सांस्कृतिक प्रक्रिया। जीवन जैसा है उसे अधिक सुन्दर उदात्त और मंगलमय बनाने की इच्छा आरम्भ से ही मनुष्य में रही है। यही इच्छा जब सामाजिक स्तर पर रूप लेती है, तब वह संस्कृति कहलाती है, जिसके अन्तर्गत धर्म, नीति, कला, साहित्य, संगीत आदि आते हैं। संस्कृति समाज की मूल जीवनदायिनी शक्ति है, राजनैतिक शक्ति से भी अधिक। भारतीय समाज इसका प्रमाण है। राजनैतिक दासता सदियों रही; पर संस्कृति की शक्ति के कारण यह जाति जीवित रही और विकास करती गयी। इसके साथ ही लगी आती है, सामाजिक विकास की शक्ति। राजनैतिक उलट-फेर होते रहते हैं, पर समाज में विकास की परम्परा चलती रहती है। ऊपर-ऊपर मुसलमान और हिन्दू राजाओं में युद्ध चलते रहते थे, पर समाज में हिन्दू-मुसलमान एक-दूसरे के साथ भ्रातृ-भाव से रहने के प्रयत्न कर रहे थे। वे एक-दूसरे से विचारों, आदर्शों, प्रथाओं और धार्मिक मान्यताओं का आदान-प्रदान भी कर रहे थे। वे एक-दूसरे के जीवन को प्रभावित कर रहे थे। तभी मध्य युग में उधर हिन्दू और मुसलमान राजाओं की टक्कर होती थी, लेकिन मुसलमान आदि ब्रजभाषा में कृष्ण-काव्य लिख रहे थे और हिन्दू-मुसलमान पीरों और फकीरों की पूजा कर रहे थे। समाज अपने में किसी बाधा को स्वीकार नहीं करता, चाहे वह राजनैतिक हो या धार्मिक। इस भारतीय समाज की विकास-यात्रा बहुत दिलचस्प है। इसमें कितने उलट-फेर हुए हैं! कितनी जातियाँ यहाँ आयीं और विलीन हो गयीं, किस प्रकार उन्होंने एक-दूसरे
| Brand Name | Nayee Kitab Prakashan |
| Manufacturer | Ananya Prakashan |
| Item Type | Indian History · Books |
| Shipping Weight | 100 g |
| Package Dimensions | 21 × 15 × 2 cm |
| Category | Books › History › Indian History |
| Category Rank | #32,016 in Books |
| Marketplace Rating | 4.4 out of 5 (13 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789348409621 |