
ईर्ष्या और प्रेम, दोनों में ही स्त्री का अन्तर्संघर्ष शरद पूर्णिमा की ज्योत्स्ना में उद्वेलित समुद्र के दुर्दमनीय ज्वार की भाँति होता है, लेकिन यदि उसे मर्यादा के पिंजरे में बन्द कर दिया जाए, तो स्त्री की आत्म-प्रताड़णा भी उतनी ही प्रचंड हो उठती है। पुरुष इन्हीं स्थितियों के बीच कहीं खिलौना बनता है, कहीं स्त्री का भाग्य-निर्णायक। परिवार और समाज स्त्री और पुरुष को सँभाले अपनी मान्यताओं के झोंकों से जीवन की नाव को खेते रहते हैं। जीवन यों ही गतिमान रहता है... जब रवीन्द्रनाथ उपन्यासों में अपने काल के समाज को सँजो रहे थे, तब स्त्री अपने व्यक्तित्व के प्रति सजग होना प्रारम्भ ही हुई थी। ‘चोखेर बालि’ को पढ़ने से इस बात की पुष्टि हो जाएगी।
| Brand Name | Rajkamal Prakashan |
| Manufacturer | Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd |
| Item Type | Literature & Fiction · Books |
| Shipping Weight | 300 g |
| Package Dimensions | 19.8 × 12.9 × 1.7 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction |
| Category Rank | #955,102 in Books |
| Marketplace Rating | 4.3 out of 5 (131 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789360865368 |