
यह पुस्तक विचारशीलता के दो प्रमुख परंपराओं, 'वाद' और 'दर्शन', के मध्य एक महत्वपूर्ण चर्चा प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक में दीनदयाल उपाध्याय के द्वारा एकात्म मानवतावाद के सिद्धांत की महत्वपूर्ण चर्चा है। दर्शन और वाद के अंतर को समझने के लिए इस पुस्तक को पढ़ना उपयुक्त है। इस पुस्तक में दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का विस्तृत विश्लेषण है जो एकात्म मानवतावाद के सिद्धांत को स्पष्ट करता है। यह पुस्तक समाजवाद और व्यक्तिवाद के बीच एक मध्यमार्ग की खोज में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दर्शन और वाद के बीच विचारशीलता की यह चर्चा सामाजिक, राजनीतिक, और आध्यात्मिक संदर्भों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पुस्तक सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भारतीय समाज के विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान के बारे में विचार करने के लिए महत्वपूर्ण है। इस पुस्तक का अध्ययन करने से पाठक एकात्म मानवतावाद के सिद्धांत को समझेंगे और उसे अपने जीवन में अनुप्रयोग करने के लिए प्रेरित होंगे।
| Brand Name | Prabhat Prakashan |
| Manufacturer | Prabhat Prakashan |
| Item Type | Political Structure & Processes · Books |
| Shipping Weight | 358 g |
| Package Dimensions | 21.4 × 14.9 × 1.8 cm |
| Category | Books › Politics › Political Structure & Processes |
| Category Rank | #153,991 in Books |
| Marketplace Rating | 4.5 out of 5 (99 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789351860143 |
| Attributes | Language Published: Hindi · Binding: Paper Back |



