
मोम की हज़ारों चौकोर पट्टियों पर, चांदी की दहकती सलाइयों से उकेरी गई एक रहस्यमय दंतकथा। जिसके शुरूआती हिस्से, जीभ की नोक से लिखी जाने वाली प्राचीन 'क्युटिन' लिपि में लिखे गए। किताब....जो सदियों तक ग़ायब रही। रहस्यदर्शियों और स्वप्नद्रष्टाओं ने जिसे अँधेरी, ख़ुफ़िया जगहों पर हिफ़ाज़त से छिपाकर रखा। एक महान कलाकृति के स्याह मिथकों की पौराणिक युगगाथा....रहस्यवादी ताक़तों और पुरातन प्राणियों का वो करिश्माई जगत, जो बौनों और दानवों की गुप्त फुसफुसाहटों के नीचे कहीं दफ़न था। उस हैरतअंगेज़ जंगबाज़ की दास्तान, जो दुनिया-का-सबसे बुज़ुर्ग-शिशु था और उस अजीब प्राणी की बेमिसाल शक्तियाँ, जो ‘लगभग-अमर’ था। एक तीव्र आग्रह हमेशा ये किया गया कि उस नन्ही प्रजाति का चमत्कारिक-इतिहास, कभी दुनिया को न बताया जाए, ‘बौने’ भी जिन्हें ‘बौना’ कहते हैं..... दुनिया इस विलक्षण दास्तान से अजानी ही रह जाती अगर इसे छेनी-हथौड़ी से गुफा की दीवारों पर न खोदा होता। जिस्मानी और रूहानी-कीमिया से गुज़रे वो तीन योद्धा....जो उस पानी की तलाश में निकले जिसमे 'गीलापन' नहीं होता। शताब्दियों पुराना वो दुष्ट-षड़यन्त्र....जिसका संकेत दिया आधी-जवान बुढिया ने, और सामने आया वो बूढा.....शातिरपन भी जिससे चालाकी उधार लेता था। मायावी लेखनियों का ग्रन्थ रचने वाला वो लिपिकार जो किताबों के धूल भरे गलियारे में अपनी आत्मा ही रखकर भूल गया। आसमान छूती उस रहस्यमय पहाड़ी पर बने काठघर में खुला वो रहस्य जो अग्निशास्त्र के पन्नों में कहीं दबा था। और सामने आया इस दास्तान का सबसे शक्तिशाली किरदार जो अग्निशास्त्र की हिफ़ाज़त के लिए सदियों बाद दुनिया की सबसे अँधेरी गुफा से बाहर निकला....
| Brand Name | PANKH PRAKASHAN |
| Manufacturer | PANKH PRAKASHAN |
| Item Type | Myths, Legends & Sagas · Books |
| Shipping Weight | 750 g |
| Package Dimensions | 21.6 × 14 × 3.8 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction › Myths, Legends & Sagas |
| Category Rank | #22,566 in Books |
| Marketplace Rating | 4.7 out of 5 (38 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789394878426 |



