
हिन्दी साहित्य के पिछले कुछ दशक कविताओं, गजलों और कहानियों के लिए बहुत उर्वर रहे हैं। आलोचना भी खूब लिखी गई है। विविध विषयों पर दृष्टि और संवेदना जगाने वाले ललित आलेखों का बहुत अभाव रहा है। इस परिदृश्य में ध्रुव गुप्त की इस किताब फिर तेरी कहानी याद आई का निश्चित ही स्वागत होगा। ध्रुव नारायण गुप्त भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी और कवि, कथाकार गजलगो, फीचर लेखक और संस्कृतिकर्मी हैं। धुव गुप्त अपनी कविताओं, गजलों और कहानियों के अलावा विविध विषयों पर अपने विचारोत्तेजक आलेखों के लिए भी जाने जाते हैं। फिर तेरी कहानी याद आई हाल के वर्षों में पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित उनके आलेखों का संकलन है। इनमें इतिहास भी है, संस्कृति भी, मिथक भी, साहित्य भी धर्म-अध्यात्म भी और कला भी। इन आलेखों में जो बात सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है, वह है, किसी भी विषय को देखने-परखने की लेखक की वस्तुपरक, तार्किक, वैज्ञानिक और समाजशास्त्रीय दृष्टि मिथकों की गहराई में जाकर जिस तरह उन्होंने उनके वास्तविक अर्थ और संदेश उद्घाटित करने की कोशिश की है, वह चकित भी करता है और दृष्टिसम्पन्न भी।
| Brand Name | Anamika Prakashan |
| Manufacturer | Anamika Prakashan |
| Item Type | Poetry · Books |
| Shipping Weight | 100 g |
| Package Dimensions | 21.5 × 14 × 1.5 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction › Poetry |
| Category Rank | #978,217 in Books |
| Marketplace Rating | 4.6 out of 5 (45 ratings on the source marketplace) |