
हर दिल में, हर आँख में, स्वप्नों का, आदर्शों का और आने वाली ऋतुओं के सौरभ का एक गाँव बसता है। मुनव्वर राना ने अपनी उद्दीप्त कल्पनाओं में जो बस्ती बसा रक्खी है, उसका नाम है "ग़ज़ल गाँव!' राना इस बस्ती का बाँका भी है और इसका बाँसुरी बजैया भी ! ‘ग़ज़ल गाँव' की भोर और गोधूलि, दोनों बेलाओं में उसकी अनुभूतियों की बहुरंगी छायाएं लहराती हैं। राना के बाँकपन में सन्तों जैसी उदारता और मानवीय दुखों का गहरा बोध भी शामिल है। यह बाँकपन और उदारता, दोनों उसकी जन्म भूमि की परम्पराएँ हैं। शहीदों, कवियों और भक्तों की धरती रायबरेली, जहाँ से उठे थे मलिक मुहम्मद जायसी और उर्दू के उत्कृष्ट काव्यालोचक- अब्दुल हई - 'तज़करा-ए-गुलेराना' के लेखक। इसी मिट्टी के हवाले उसे चिन्तन की शक्ति भी मिली है और अपने अन्तर्मन को अभिव्यक्त करने का हौसला भी । -इरफ़ान सिद्दीक़ी
| Brand Name | Vani Prakashan |
| Manufacturer | Vani Prakashan |
| Item Type | Music · Books |
| Shipping Weight | 120 g |
| Package Dimensions | 20.8 × 13.7 × 0.8 cm |
| Category | Books › Arts, Film & Photography › Music |
| Category Rank | #414,873 in Books |
| Marketplace Rating | 4.3 out of 5 (14 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9788181439796 |
| Attributes | Vani Prakashan |



