
हिन्दी साहित्य का आरम्भ आठवीं शताब्दी से माना जाता है। यह वह समय है जब सम्राट् हर्ष की मृत्यु के बाद देश में अनेक छोटे छोटे शासनकेन्द्र स्थापित हो गए थे जो परस्पर संघर्षरत रहा करते थे। विदेशी मुसलमानों से भी इनकी टक्कर होती रहती थी। धार्मिक क्षेत्र अस्तव्यस्त थे। इन दिनों उत्तर भारत के अनेक भागों में बौद्ध पन्थ का प्रचार था। बौद्ध पन्थ का विकास कई रूपों में हुआ जिनमें से एक वज्रयान कहलाया। वज्रयानी तान्त्रिक थे और सिद्ध कहलाते थे। इन्होंने जनता के बीच उस समय की लोकभाषा में अपने मत का प्रचार किया। हिन्दी का प्राचीनतम साहित्य इन्हीं वज्रयानी सिद्धों द्वारा तत्कालीन लोकभाषा पुरानी हिन्दी में लिखा गय इसके बाद नाथपन्थी साधुओं का समय आता है। इन्होंने बौद्ध, शांकर, तन्त्र, योग और शैव मतों के मिश्रण से अपना नया पन्थ चलाया जिसमें सभी वर्गों और वर्णों के लिए धर्म का एक सामान्य मत प्रतिपादित किया गया था। लोकप्रचलित पुरानी हिन्दी में लिखी इनकी अनेक धार्मिक रचनाएँ उपलब्ध हैं। इसके बाद जैनियों की रचनाएँ मिलती हैं। स्वयम्भू का "पउमचरिउ' अथवा रामायण आठवीं शताब्दी की रचना है। बौद्धों और नाथपंथियों की रचनाएँ मुक्तक और केवल धार्मिक हैं पर जैनियों की अनेक रचनाएँ जीवन की सामान्य अनुभूतियों से भी संबद्ध हैं। इनमें से कई प्रबंधकाव्य हैं। इसी काल में अब्दुर्रहमान का काव्य "सन्देशरासक' भी लिखा गया जिसमें परवर्ती बोलचाल के निकट की भाषा मिलती है। इस प्रकार ग्यारहवीं शताब्दी तक पुरानी हिन्दी का रूप निर्मित और विकसित होता रहा।
| Brand Name | Sahitya Sarowar |
| Manufacturer | SAHITYA SAROWAR ORIGINAL BLACK CLASSIC |
| Item Type | Uttarakhand · Books |
| Package Dimensions | 21.2 × 14.2 × 2.2 cm |
| Category | Books › School Books › State Education Boards › Uttarakhand |
| Category Rank | #489,631 in Books |
| Marketplace Rating | 4.3 out of 5 (1K+ ratings on the source marketplace) |
| Attributes | Easy to Read |