
‘इतिहास का वर्तमान: आज के बौद्धिक सरोकार’ इस विमर्श-व्याकुल समय में तर्क, विवेक, परंपरा, निहितार्थ और रचनात्मक साहस सहेजकर लिखी गई एक अद्भुत पुस्तक है। इसके लेखक भगवान सिंह विभिन्न विधाओं में सक्रिय किंतु इतिहास-विवेचन में सर्वाधिक ख्यातिप्राप्त सजग मनीषी हैं। उनकी इतिहास-दृष्टि स्पष्ट, प्रमाण पुष्ट और चिंतन संपन्न है। यही कारण है कि जब भगवान सिंह ‘तुमुल कोलाहल समय’ व ‘स्वार्थसिद्ध वाग्युद्ध’ को परखने के लिए विचारों में प्रवेश करते हैं तो चिंतन की एक अलग रूपरेखा तैयार होने लगती है। स्वयं लेखक ने कहा है– “मैंने चर्चाओं को शीर्षक तो दिए हैं, परंतु उन विषयों का सम्यव्फ निर्वाह नहीं हुआ है। बातचीत करते हुए आप किसी विषय से बँधकर नहीं रह पाते। बात आरंभ जहाँ से भी हुई हो बीच में कोई संदर्भ, दृष्टांत, प्रसंग आते ही विषय बदल जाता है और आप भूल जाते हैं बात कहाँ से आरंभ हुई थी। याद भी आई तो आप कई बार स्वयं पूछते हैं, ‘हाँ तो मैं क्या कह रहा था?’ गरज कि सुनने वाले को आप क्या कह रहे हैं इसका हिसाब भी रखना चाहिए! परंतु सबसे मार्मिक प्रसंग तो उन विचलनों में ही आते हैं, तभी तो अपना दबाव डालकर वे धरा को ही बदल देते हैं ।” आज सच और झूठ के बीच भीषण संघर्ष चल रहा है। भगवान सिंह इसमें अपना पाठ और पक्ष रखते हैं। वे वर्तमान राजनीतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक आदि परिस्थितियों से उठ रहे सवालों से मुठभेड़ करते हैं। तात्कालिक घटनाओं को खँगालकर वे कोई जीवन-मूल्य या ऐतिहासिक सत्य सामने रख देते हैं। असहिष्णुता, आजादी, देशभक्ति, भारतमाता की संकल्पना, राजनीति का सांप्रदायिक कारोबार जैसे आयोजित-प्रायोजित प्रश्नों के बीच यह पुस्तक एक प्रकाश स्तंभ है। संवाद की अत्यंत पठनीय शैली में लिखे गए इसके आलेख आमने-सामने बैठकर की जाने वाली बातचीत का सुख भी देते हैं। उस हरेक पाठक के लिए एक अपरिहार्य पुस्तक जो वर्तमान की विशेषताओं और विरूपताओं दोनों को समझना चाहता है।
| Brand Name | Kitabghar Prakashan |
| Manufacturer | Kitabghar Prakashan |
| Item Type | Essays · Books |
| Shipping Weight | 365 g |
| Package Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.6 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction › Essays |
| Category Rank | #418,189 in Books |
| Marketplace Rating | 4.6 out of 5 (7 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9788193372852 |



