
प्रतिष्य के संर में और गंगा तट की सिकता भूमि में अनेक शिविर और फूस पड़े हैं। माय की अमावस्या की गोधूली में प्रयाग के वाँध पर प्रभात का-सा चाय और कोलाहल तथा धर्म लूटने की धूम कम हो गई है, परन्तु बहुत-से घायल और सुचते हुए अर्धमृतकों की आर्त ध्वनि उस पावन प्रदेश को आशीर्वाद दे रही है। स्वयं-संवक उन्हें सहायता पहुंचाने में व्यस्त हैं। यों तो प्रतिवर्ष यहाँ पर जन-समूह एकच होता है, पर अबकी बार कुछ विशेष पर्व की घोषणा की गई थी इसीलिए भीड़ अधिकता से हुई। कितने के हाथ टूटे, कितनों का सिर फूटा और कितने ही पसलियों की हड्डियों शैवाकर, अधोमुख होकर त्रिवेणी को प्रणाम करने लगे। लगे। एक नीरव अवसाद, सन्ध्या में गंगा के दोनों तट पर खड़े झोंपड़ों पर अपनी कालिमा बिखेर रहा था। नंगी पीठ घोड़ों पर नंगे साधुओं के चढ़ने का जो उत्साह था, जो तलवार की फिकैती दिखलाने की त्पर्धा थी, दर्शक-जनता पर बालू वर्षा करने का जो उन्माद या, बड़े-बड़े कारचोवी अण्डों को आगे से चलने का जो आतंक था, वह सब अब फीका हो चला था। एक छायादार डोंगी, जमुना के प्रशान्त वक्ष को आकुलित करती हुई गंगा की प्रखर धारा को काटने लगी-उस पर चढ़ने लगी। माझियों ने कसकर डाँडे लगाए। नाव झूसी के तट पर जा लगी। एक सम्भ्रान्त सज्जन और युवती, साथ में एक नौकर, उस पर से उतरे। पुरुष यौवन में होने पर भी कुछ खिन्न-सा था, युवती हँसमुख थी, परन्तु नौकर बड़ा ही गम्भीर बना था। यह सम्भवतः उस पुरुष की प्रभावशालिनी शिष्टता की शिक्षा थी। उसके हाथ में एक बाँस की डोलची थी, जिसमें कुछ फल और मिठाइयों थीं। साधुओं के शिविरों की पंक्ति सामने थी, वे लोग उसी ओर चले। सामने से दो मनुष्य बातें करते आ रहे थे-
| Brand Name | Nayee Kitab Prakashan |
| Manufacturer | Nayee Kitab Prakashan |
| Item Type | Classic Fiction · Books |
| Shipping Weight | 100 g |
| Package Dimensions | 21 × 14 × 1 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction › Classic Fiction |
| Category Rank | #82,854 in Books |
| Marketplace Rating | 4.3 out of 5 (1K+ ratings on the source marketplace) |