
कर्म-विपाक संहिता - प्रस्तुत ग्रन्थ भगवान शिव और माता पार्वती के मध्य हुए संवाद के आधार पर उद्भूत हुआ है, जिसमें मनुष्य जन्म के प्रत्येक नक्षत्र के प्रत्येक चरण के अनुसार फलादेश अंकित किये गये हैं। मनुष्य अपने पूर्व जन्म-जन्मान्तरकृत कृत्यों के अनुरूप ही किसी भी नक्षत्र के किसी भी चरण में जन्म लेता है और उसी के अनुसार अपने कर्मों का भोग भोगता है। इस ग्रन्थ में वर्णित तथ्यों के आधार पर मनुष्य द्वारा उसके पूर्व जन्म-जन्मान्तरों में किये गये शुभ-अशुभ कर्मों की सम्पूर्ण जानकारी मिल जाती है और उस मनुष्य द्वारा कारित दुष्कर्मों के परिणामों की किस प्रकार शान्ति की जाये ताकि उसका जीवन सुखी और सम्पन्न हो सके, भगवान शिव-पार्वती के मध्य हुई वार्त्ता से उसका स्पष्टीकरण भी हो जाता है। क्रियमाण कर्म वे होते हैं, जिन्हें मनुष्य वर्तमान जीवन में कर्ता बनकर इकट्ठा करता है। अर्थात् जब वह स्वयं को कर्ता मानते हुए कर्म करता है, वे उसके क्रियमाण कर्म कहे जाते हैं। उसके वर्तमान जीवनकाल में जो-जो कर्म होते हैं, वे सब क्रियमाण कर्म कहलाते हैं। ये कर्म प्रतिदिन होते रहते हैं। इनमें से कुछ कर्म प्रतिदिन भोग लिये जाते हैं और शेष प्रतिदिन हमारे चित्त में एकत्र होते रहते हैं। ज्योतिष , अध्यात्म , तंत्र एवं पूजा पाठ से सम्बंधित कोई भी पुस्तक प्राप्त करने के लिए आस्था प्रकाशन मंदिर से संपर्क करें - 9650084977 To purchase any spiritual , astrology or Tantra book contact astha prakashan mandir - 8130912375
| Brand Name | Astha Prakashan Mandir |
| Manufacturer | Astha Prakashan Mandir |
| Item Type | Astrology · Books |
| Shipping Weight | 331 g |
| Package Dimensions | 21.6 × 14 × 1.2 cm |
| Category | Books › Religion & Spirituality › New Age & Spirituality › Astrology |
| Category Rank | #19,587 in Books |
| Customer Reviews | 4.1 out of 5 (43 ratings) |



