
हम जितने होते हैं वो हमें हमसे कहीं ज़्यादा दिखाती है। कभी एक गुथे पड़े जीवन को कलात्मक कर देती है तो कभी उसके कारण हमें डामर की सड़क के नीचे पगडंडियों का धड़कना सुनाई देने लगता है। वह कविता ही है जो छल को जीवन में पिरोती है और हमें पहली बार अपने ही भीतर बैठा वह व्यक्ति नज़र आता है जो समय और जगह से परे, किसी समानांतर चले आ रहे संसार का हिस्सा है। कविता वो पुल बन जाती है जिसमें हम बहुत आराम से दोनों संसार में विचरण करने लगते हैं। हमें अपनी ही दृष्टि पर यक़ीन नहीं होता, हम अपने ही नीरस संसार को अब इतने अलग और सूक्ष्म तरीक़े से देखने लगते हैं कि हर बात हमारा मनोरंजन करती नज़र आने लगती है। —मानव कौल.
| Brand Name | Hind Yugm |
| Manufacturer | Hind Yugm |
| Item Type | Poetry · Books |
| Shipping Weight | 180 g |
| Package Dimensions | 19.6 × 13 × 1.9 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction › Poetry |
| Category Rank | #15,208 in Books |
| Marketplace Rating | 4.6 out of 5 (389 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9788195106332 |