
कृष्ण का व्यक्तित्व बहुत अनूठा है। अनूठेपन की पहली बात तो यह है कि कृष्ण हुए अतीत में हैं, लेकिन हैं भविष्य के । मनुष्य अभी भी इस योग्य नहीं हो पाया कि कृष्ण का समसामयिक बन सके। अभी भी कृष्ण मनुष्य की समझ के बाहर हैं। भविष्य में ही यह संभव हो पाएगा कि कृष्ण को हम समझ पाएं। कृष्ण अकेले ही ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों और ऊंचाइयों पर होकर भी गंभीर नहीं हैं, उदास नहीं हैं, रोते हुए नहीं हैं । साधारणतः संत का लक्षण ही रोता हुआ होना है=जिंदगी से उदास, हारा हुआ, भागा हुआ। कृष्ण अकेले ही नाचते हुए व्यक्ति हैं-हंसते हुए, गीत गाते हुए। अतीत का सारा धर्म दुखवादी था। कृष्ण को छोड़ दें तो अतीत का सारा धर्म उदास, आंसुओं से भरा हुआ था। हंसता हुआ धर्म, जीवन को समग्र रूप से स्वीकार करने वाला धर्म अभी पैदा होने को है। पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु * कृष्ण का व्यक्तित्व और उसका महत्वः आज के संदर्भ में आध्यात्मिक संभोग का अर्थ * जीवन में महोत्सव के प्रतीक कृष्ण * स्वस्थ राजनीति के प्रतीकपुरुष कृष्ण * सात शरीरों की साधना
| Brand Name | Fourth Estate |
| Manufacturer | Diamond Pocket Books Pvt Ltd |
| Item Type | Biographies & Autobiographies · Books |
| Shipping Weight | 745 g |
| Package Dimensions | 21.5 × 17.3 × 2.8 cm |
| Category | Books › Biographies, Diaries & True Accounts › Biographies & Autobiographies |
| Category Rank | #33,346 in Books |
| Customer Reviews | 4.6 out of 5 (108 ratings) |
| EAN | 9789352969159 |
| Attributes | Language Published: Hindi · Binding: Paper Back |