
‘मुक्त हुए रिश्ताई मुक्तक’ के 250 मुक्तकों के संग्रह से गुज़रने के बाद मन तो यह करता है कि इनको बार-बार पढ़ें और इनमें समाहित भावों को आत्मसात करें ताकि इनकी मंद-मंद सुगंधि से तृप्ति एवं तुष्टि मिलती रहे। इन मुक्तकों में पाठकों को जीवन का सत्य तो मिलता ही है साथ-साथ समाज को कुछ चेतावनियाँ भी मिलती है। कवि की ये चेतावनियाँ आज के समय में अनिवार्य हो गई हैं। मैं यह आशा करता हूँ कि इस प्रवासी कवि के इस नवीनतम मुक्तक संग्रह का साहित्य जगत में स्वागत होगा और पाठक इससे लाभ उठा कर समाज को कुछ वापस देने की इच्छा को भी जन्म देंगे। ईश्वर से यह प्रार्थना है कि कन्हैया की काव्य साधना को वह अपना आशीर्वाद देते हुए इसे निरंतर गति प्रदान करता रहे ताकि यह अपने अभीष्ट गंतव्य तक पहुँच सके और माँ सरस्वती उनकी काव्य यात्रा को कभी न रुकने दे। डॉ. कृष्ण कन्हैया के अन्य मुक्तक संग्रहों की प्रतीक्षा लिए बैठा हूँ। –डॉ. कृष्ण कुमार संस्थापक अध्यक्ष गीतांजलि बहुभाषीय साहित्यिक समुदाय बर्मिंघम
| Brand Name | The Penman |
| Manufacturer | The Penman |
| Item Type | Poetry · Books |
| Shipping Weight | 200 g |
| Package Dimensions | 22 × 14 × 1.5 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction › Poetry |
| Category Rank | #465,874 in Books |
| Marketplace Rating | 5.0 out of 5 (11 ratings on the source marketplace) |