
पिछले वर्ष जब ‘आत्मकथा’ लिखनी शुरू की थी तो सोचता था वे सारे प्रसंग कैसे लिखूं। बहुत से बड़े-बड़े नेताओं को अच्छा नहीं लगेगा। परंतु अब निर्णय किया है कि मैंने सक्रिय राजनीति छोड़ दी। राजनीति में भी अब मेरी उपस्थिति नाममात्र की होगी। कुछ मित्रों से मैंने कहा भी था, मैं अब ‘गैस्ट आर्टिस्ट’ की तरह रहूंगा एक ‘अतिथि सदस्य’ के रूप में। पहले मैं राजनेता था, इसलिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नियंत्रित रखनी पड़ती थी। अब मैं पहले एक लेखक हूं उसके बाद कुछ और। इसलिए लेखक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मेरा अधिकार है। मैंने ‘आत्मकथा’ लिखने में उसका पूरा उपयोग किया है और बहुत कुछ अनकहा भी अब कह दिया है। मैंने पूरा जीवन जी लिया। जी भर जिया, पूरे आनंद से जिया। जीवन जिया भी और उसकी पूरी कहानी और अनुभव आज विस्तार से लिख भी दिया। जीवन का शेष विवेकानंद सेवा केंद्र में प्रभु को अर्पण करूंगा। अब उस घड़ी की प्रतीक्षा करूंगा, जब मुझे इस बार का दायित्व निभाकर वहां जाना है जहां से मैं आया था। सच कहता हूं हंसता-मुस्कराता गीत गाता हुआ जाऊंगा। -शान्ता कुमार
| Brand Name | Kitabghar Prakashan |
| Manufacturer | Kitabghar Prakashan |
| Item Type | Biographies & Autobiographies · Books |
| Shipping Weight | 600 g |
| Package Dimensions | 22.5 × 14.5 × 3.6 cm |
| Category | Books › Biographies, Diaries & True Accounts › Biographies & Autobiographies |
| Category Rank | #411,369 in Books |
| Marketplace Rating | 4.3 out of 5 (23 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9788195166350 |