
“पापा और ज़िंदगी पे नोट्स” मोहित की पहली किताब है—कविताओं और शायरियों का एक ऐसा संग्रह, जो जीवन के कई रंगों को एक ही धागे में पिरो देता है। यह किताब सिर्फ़ शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि एक निजी यात्रा का आईना है—जहाँ यादें भी हैं, सवाल भी, टूटन भी और उम्मीद भी। इस संग्रह का सबसे भावुक और केंद्रीय हिस्सा पापा हैं। मोहित ने अपने पिता के साथ जुड़ी यादों, उनके जाने के बाद रह गई खाली जगह, और उस रिश्ते की गर्माहट को बहुत सादगी और ईमानदारी से लिखा है। कई पन्नों पर एक बेटे का प्रेम दिखता है, कई पंक्तियों में एक दोस्त का खो जाना—और कहीं-कहीं वह मौन, जो सबसे ज़्यादा बोलता है। किताब का बाकी हिस्सा ज़िंदगी के अनुभवों से बना है—छोटे-छोटे सच, रिश्तों की परतें, अकेलापन, संघर्ष, और रोज़मर्रा की भावनाएँ। कहीं कविता की लय है, कहीं शायरी की चमक—पर हर जगह एक ही बात साफ़ है: लेखक ने जो महसूस किया, उसे सजाकर नहीं, जैसा है वैसा लिख दिया। अगर आप कविता-शायरी में खुद को ढूँढते हैं—या अपने अनुभवों को शब्दों में साझा होते देखना चाहते हैं—तो “पापा और ज़िंदगी पे नोट्स” आपको आत्ममंथन और संवेदनाओं की गहराई तक ले जाएगी।
| Brand Name | Khwaab Publication |
| Manufacturer | Khwaab Publication |
| Item Type | Poetry · Books |
| Shipping Weight | 430 g |
| Package Dimensions | 21.6 × 14 × 2.2 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction › Poetry |
| Category Rank | #324,292 in Books |
| Marketplace Rating | 4.7 out of 5 (13 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9788199435865 |