
राधा तन मन कृष्णमय, कहने को दो नाम। एक प्रेम की मूर्ति है, दूजा प्रेम धाम ॥ भक्तों से निवेदन कोई भी व्यक्ति किसी भी भाषा में, किसी भी रंग की स्याही से कहीं भी, कभी भी राधा-नाम लेखन कार्य कर सकता है। इसमें जाति व उम्रन का बंधन नहीं है। राधे-राधे लाल स्याही से लिखें तो अति उत्तम है, क्योंकि प्रेम का रंग लाल होता है। इस पुस्तिका में राधा नाम ही लिखे। राधे-राधे लिखने से अनंत पुण्य प्राप्त होता है। कबिरा-कबिरा क्यं कहे, जा जमुना के तीर। एक गोपी के प्रेम में वह गये कोटि कबीर ॥ राधा नाम लिखने का काम दिन या रात कभी भी कर सकते है। इस पुस्तिका को भगवत् स्वरूप समझका राधा नाम लेखन के अतिरिक्त अन्य काम में न लें। पुस्तिका पूर्ण हो जाने के पश्चात् सुरक्षित स्थान (पूजा स्थल) पर रखे। एक पुस्तिका का उपयोग एक ही व्यक्ति करें जिससे जप संख्या गणना में सहजता रहे। राधा नाम लेखन पुस्तिका आप अपने लिये, परिजनों, भक्तों अथवा धर्म प्रचार के लिये वितरण हेतु गैंगवा सकते हैं या किसी धार्मिक संस्था, मंदिर को भी भेंट कर सकते हैं। राधा नाम लेखन से जो आप राधा नाम रूपी धन इकठ्ठा करोगे, इसका नामिनेशन (बंटवारा) नहीं होगा, न ही इस पर किसी प्रकार का कर देय होगा। यह राधा नाम रूपी धन आपका है, आपका ही रहेगा। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरि अनंत लीलाधारी। राधा जैसी प्रीति करूँ मैं, तजि जग-भ्रम भारी।। जपसंख्या प्रत्येक पृष्ठ पर : 432 नामजप x कुल पृष्ठ : 260 = अंतिम संख्या : 1,12,320 नामजप
| Brand Name | Dharmik Sahitya |
| Manufacturer | Dharmik Sahitya |
| Item Type | Baha'i · Books |
| Shipping Weight | 400 g |
| Package Dimensions | 24.2 × 18.6 × 2.3 cm |
| Category | Books › Religion & Spirituality › Baha'i |
| Category Rank | #4,919 in Books |
| Customer Reviews | 4.6 out of 5 (53 ratings) |
| EAN | 9789371185929 |



