
About the Book: क्या कभी आपने अपनी सफलताओं के पीछे छिपे मलबे को गिना है? दुनिया ‘जीत’ का जश्न मनाती है, मगर यह किताब उन ‘हार’ की इबादत है जिन्होंने हमें इंसान बनाया। ‘रायगानी’ सिर्फ़ एक शब्द नहीं, उन सिसकियों का दस्तावेज़ है जो महफ़िलोंके शोर में दब गईं। यह दस्तावेज़ है उस मासूमियत की शहादत का जो हॉस्टल की दीवारों के बीच कहीं खो गई, और उस इज़्ज़त का जो अपनों की उम्मीदों की भेंट चढ़ गई। यह उन तमाम लड़कों की कहानी है जो ‘मज़बूत’ बनने की होड़ में पत्थर हो गए, और उन बेटियों की दास्तां है जिनकी पहचान ‘पराया धन’ के जुमले में रायगां कर दी गई। यह किताब लेखक का एक नग्न और ईमानदार सत्य है। इसमें माँ के मुसल्ले की सिसकियाँ हैं, बहन की ख़ाली कलाई का दर्द है और एक पत्नी की वह ख़ामोश तपस्या है जिसने तन्हाई का ज़हर पीकर भी घर की लाज बचाए रखी। यहाँ राम की मर्यादा का बोझ, कृष्ण का अधूरा प्रेम, ओशो का बुद्धत्व भी है और जौन एलिया की तबाही भी। यह प्रकृति की चीख से लेकर आर्यावर्त के गिरते स्वाभिमान तक की एक महा-यात्रा है। यह किताब लेखक के अपने गुनाहों, अपनी रातों की वीरानी और अपनी ही रूह के मलबे पर किया गया एक आख़िरी रक़्स है। यह उन तमाम लोगों के लिए एक घर है, जिन्हें लगता है कि वे भीड़ में अकेले हैं और जिनका सच आज की डिजिटल दुनिया के लिए महज़ ‘बेकार’ (Waste) है। “अगर आपकी रूह में रत्ती बराबर भी टीस बाकी है, तो यह पन्ने आपको पुकार रहे हैं।” About the Author: मधुसूदन बिश्नोई जवाहर नवोदय विद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं। उनका लेखन अवलोकन, अनुभव, स्मृति और मन के उन कोनों से जन्म लेता है जहाँ शब्द अक्सर चुप रह जाते हैं। वे लिखना किसी उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि महसूस किए गए सच को बचाए रखने के लिए मानते हैं। रायगानी उनकी पहली पुस्तक है जो कहे नहीं गए उन भावों और भीतर की ख़ामोशियों का संकलन है।
| Brand Name | SVAYANYUG PUBLICATION |
| Manufacturer | Svayanyug Publication LLP |
| Item Type | True Accounts · Books |
| Category | Books › Biographies, Diaries & True Accounts › True Accounts |
| Category Rank | #32,314 in Books |
| Customer Reviews | 4.6 out of 5 (29 ratings) |
| EAN | 9789348420282 |