
जवानी में भले ही किसी के प्यार में पड़ने का मौका न मिला हो लेकिन उसकी कल्पनाओं में उसके प्यार में एक बार हर कोई जीता है। प्रेम होने मात्र का अहसास जब दिल में गुदगुदी कर जाता है तो दो नायक और एक नायिका वाले दोस्ती के नाजुक तन्तु से जुड़े प्रेम त्रिकोण की बात हो कान तो हर उम्र के शख्स के खड़े हो ही जाते हैं क्योंकि प्रेम की कोई उम्र थोड़े ही होती है। इस कहानी में वह सब कुछ है जो आप पढ़ना चाहते हैं, ठीक वैसे ही जैसे माँ किसी भी पुरुष की जिन्दगी की एक महत्वपूर्ण स्त्री होती है। प्रेमिका और पत्नी उसके जीवन की दूसरी महत्वपूर्ण स्त्री होती है। दोनों ही सम्बन्धों को खुशहाल रखने की जद्दोजहद में टूटता पुरुष का मन ही है क्योंकि दोनों ही रिश्तों के केन्द्र में वह अकेला ही होता है। पुरुष की जिन्दगी का यह एक कड़वा सच है कि उसे उसके जीवन में किसकी ज्यादा अहमियत है और वह खुद किसके जीवन में ज्यादा अहमियत रखता है इन दोनों बातों में से किसी एक को चुनना होता है। वेदान्त कुछ इसी तरह की परिस्थति से गुजरता है और एक फैसला लेता है लेकिन उसका यह फैसला क्या उसकी माँ और प्रेमिका नीरा की जिन्दगी के संग न्याय कर पाता है...एक और फैसला प्रेम कहानी का दूसरा नायक गौतम भी लेता है। उसका फैसला नीरा की जिन्दगी के लिए कितना न्याय संगत होता है... पढ़िये आशीष दलाल के इस उपन्यास में। About The Author हिन्दी लेखन के क्षेत्र में तेजी से अपने कदम बढ़ा रहे और फेसबुक पर विचरते रहते आशीष दलाल प्रेम की विविध अनुभूतियों को सहज सरल शैली में शब्दों के रूप में उकेरने में माहिर है। इनका लिखा पढ़ना कोई फिल्म देखने जैसी अनुभूति है क्योंकि शब्दों की कलाकारी से इनकी कहानी का हर पात्र पाठक के संग ही जीता हुआ जान पड़ता है।
| Brand Name | Sanmati Publishers & Distributors |
| Manufacturer | Sanmati Publishers & Distributors |
| Item Type | Contemporary Fiction · Books |
| Shipping Weight | 286 g |
| Package Dimensions | 21.6 × 14 × 1.3 cm |
| Category | Books › Literature & Fiction › Contemporary Fiction |
| Category Rank | #440,706 in Books |
| Marketplace Rating | 4.2 out of 5 (27 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789388365123 |