
यह उपन्यास एक बौद्धकालीन ऐतिहासिक कृति है। लेखक के अनुसार इसकी रचना के क्रम में उन्हें आर्य, बौद्ध, जैन और हिन्दुओं के साहित्य का सांस्कृतिक अध्ययन करना पड़ा जिसमें उन्हें 10 वर्षो का समय लगा। यह उपन्यास कोई एक-दो महीनों में पूर्ण नहीं हुआ बल्कि आचार्य चतुरसेन शास्त्राी ने इत्मीनान से इसके लेखन में 1939µ1947 तक की नौ वर्षो की अवधि लगाई। इस उपन्यास के केन्द्र में ‘वैशाली की नगरवधू’ के रूप में इतिहासµप्रसिद्ध वैशाली की, सौन्दर्य की साक्षात् प्रतिमा तथा स्वाभिमान और आत्मबल से संबलित ‘अम्बपाली’ है जिसने अपने जीवनकाल में सम्पूर्ण भारत के राजनीतिक और सामाजिक परिवेश को प्रभावित किया था। उपन्यास में अम्बपाली की कहानी तो है किन्तु उससे अधिक बौद्धकालीन सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक स्थितियों का चित्राण उपलब्ध है यही उपन्यासकार का लक्ष्य भी है। विभिन्न संस्कृतियों यथा जैन, बौद्ध और ब्राह्मण के टकराव के साथ-साथ तत्कालीन विभिन्न गणराज्यों यथा काशी, कोशल, मगध एवं वैशाली के राजनीतिक संघर्षो का विवरण भी इस कृति में उपलब्ध है। उपन्यास की नायिका फिर भी ‘अम्बपाली’ ही है जो आदि से अन्त तक उपन्यास में छाई हुई है।
| Brand Name | Neha Publishers & Distributors |
| Manufacturer | Neha Publishers & Distributors |
| Item Type | Personal Transformation · Books |
| Shipping Weight | 500 g |
| Package Dimensions | 24 × 18 × 4 cm |
| Category | Books › Health, Family & Personal Development › Personal Transformation |
| Category Rank | #931,111 in Books |
| Marketplace Rating | 4.5 out of 5 (141 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9788194612629 |
| Attributes | Language Published: Hindi |



