
क्या प्रेम का अर्थ केवल पा लेना है? या अपने प्रिय को मुक्त कर देना भी प्रेम की एक महान साधना है? हम सभी ने जीवन में प्रेम किया है, किसी को 'अपना' माना है, और उसे खोने के गहरे भय को भी जिया है। परंतु जब कोई अपना हमसे दूर चला जाता है, तब भीतर जो सन्नाटा छाता है—क्या वह केवल दुःख है? विरह : प्रेम का शाश्वत स्वरूप उसी सन्नाटे और शून्यता को एक नए दृष्टिकोण से देखने की एक आध्यात्मिक अंतःयात्रा है। 'तत्सुखे सुखित्वं' जैसी हृदयस्पर्शी रचना के पश्चात, रोहित शिवोहम इस पुस्तक में प्रेम के सबसे पारदर्शी किंतु सबसे कठिन स्वरूप को उजागर करते हैं। यह पुस्तक हमें बताती है कि विरह कोई अभिशाप या विलाप नहीं, बल्कि प्रेम का 'राज्याभिषेक' है। यह वह अग्नि है जिसमें हमारा अहंकार, मोह और 'अधिकार' की भावना जलकर भस्म हो जाती है, और शेष रह जाता है केवल विशुद्ध, निस्वार्थ प्रेम। इस पुस्तक में आप क्या पाएँगे? आसक्ति और प्रेम का भेद: राजा भरत और महाराजा दशरथ की कथाओं के माध्यम से जानें कि कैसे 'मेरा' शब्द प्रेम को मोह की जंजीर बना देता है। मौन और करुणा: माता यशोधरा के महान जागरण और देवी विष्णुप्रिया के त्याग से समझें कि किसी को जाने देना हार नहीं, बल्कि प्रेम का चरम उत्कर्ष है। अद्वैत प्रेम: श्री राधा-कृष्ण के प्रसंग से जानें कि विरह वियोग नहीं, बल्कि ऐसा महायोग है जहाँ दो आत्माएँ सदा के लिए एक हो जाती हैं। मुक्त करने की कला: जीवन में किसी के जाने के बाद उस खालीपन को कैसे स्वीकारें और अतीत की स्मृतियों के भंवर से निकलकर परम शांति को कैसे प्राप्त करें। यह पुस्तक केवल पन्नों का समूह नहीं है; यह एक प्रेमी के हृदय का पिघला हुआ रक्त है। यह उन सभी के लिए एक शीतल मरहम है जो किसी के जाने की पीड़ा से गुज़र रहे हैं, जो प्रेम में टूट चुके हैं, या जो प्रेम के वास्तविक और ईश्वरीय अर्थ की खोज में हैं। आइए, 'विरह' के इस पावन मार्ग पर चलें, जहाँ पकड़ने की कोई ज़िद नहीं बचती, और मुट्ठी खोलने पर सारा आकाश आपका हो जाता है। आज ही इस पुस्तक को अपने हृदय का हिस्सा बनाएँ और प्रेम के उस निर्मल स्वरूप को जानें, जहाँ खोने का कोई भय शेष नहीं रहता।
| Brand Name | Rohit Shivoham Publication |
| Manufacturer | Rohit shivoham publication |
| Item Type | Hindi · Books |
| Shipping Weight | 400 g |
| Package Dimensions | 21 × 14 × 2 cm |
| Category | Books › Higher Education Textbooks › Humanities › Literature › Indian Literature › Hindi |
| Category Rank | #145,408 in Books |
| Marketplace Rating | 5.0 out of 5 (19 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789356357792 |