
गुह्यातिगुह्य – श्वास उच्छवास का गुप्त ज्ञान स्वर संहिता स्वर योग साधना एक प्राचीन भारतीय विज्ञान है , जिसमें मानव शरीर के जीवन - तत्व एवं प्राण रहस्य को उद्घाटित किया गया है । स्वर ज्ञान सूक्ष्म शरीर की उन समस्त नाड़ियों के सम्बन्ध में एक विस्तृत विवेचन है , जिनमें प्राण स्पन्दित होता है । स्वयंभू शिव इस स्वर योग साधना के आदि प्रणेता हैं । शिव को त्रिमूर्ति भी कहा जाता है । भगवान शिव द्वारा संचालित त्रिशूल भी जीवन के तीन मूलभूत तथ्यों की ओर ही इंगित करता है । त्रिशूल के बाँये और दाँये शूल इड़ा , पिंगला तथा केन्द्रीय शूल बिन्दु सुषुम्ना का प्रतिनिधित्व करता है । इड़ा एवं पिंगला अस्तित्व में मूल द्वन्द्व का परिचायक है , तथा केन्द्रिय ऊर्जा तत्व के रूप में सुषुम्ना मनुष्य की चेतना को उर्ध्वारोहण कराने में सक्षम है । शिव की कृपा से इड़ा , पिंगला एवं सुषुम्ना रूपी यह त्रिशूल स्वर साधना के माध्यम से स्वर योगी के षट्चक्रों का भेदन करके शुद्ध चेतना का ब्रह्म मिलन कराने में पूर्णतया समर्थ है ।
| Brand Name | Aradhya |
| Manufacturer | Aradhya |
| Item Type | Hinduism · Books |
| Category | Books › Religion & Spirituality › Hinduism |
| Category Rank | #75,397 in Books |
| Marketplace Rating | 4.2 out of 5 (7 ratings on the source marketplace) |