
अष्टावक्र की गीता को मैंने यूं ही नहीं चुना है। और जल्दी नहीं चुना है। बहुत देर करके चुना है- सोच-विचार के। दिन थे जब मैं कृष्ण की गीता पर बोला, क्योंकि भीड़-भाड़ मेरे पास थी। भीड़-भाड़ के लिए अष्टावक्र गीता का कोई अर्थ न था।बड़ी चेष्टा करके भीड़-भाड़ से छुटकारा पाया है। अब तो थोड़े-से विवेकानंद यहां हैं। अब तो उनसे बात करनी है, जिनकी बड़ी संभावना है। उन थोड़े-से लोगों के साथ मेहनत करनी है, जिनके साथ मेहनत का परिणाम हो सकता है। अब हीरे तराशने हैं, कंकड़-पत्थरों पर यह छैनी खराब नहीं करनी। इसलिए चुनी है अष्टावक्र की गीता। तुम तैयार हुए हो, इसलिए चुनी है।
| Brand Name | Diamond Books |
| Manufacturer | Diamond Books Ltd |
| Item Type | Hinduism · Books |
| Shipping Weight | 397 g |
| Package Dimensions | 21.7 × 14.1 × 1.9 cm |
| Category | Books › Religion & Spirituality › Hinduism |
| Category Rank | #16,656 in Books |
| Marketplace Rating | 4.7 out of 5 (181 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9788189605780 |