
"गीता जनक और अष्टावक्र के बीच जरा भी विवाद नहीं है. जैसे दो दर्पण एक-दूसरे के सामने रखे हो और एक-दूसरे के दर्पण में एक-दूसरे दर्पण की छवि बन रही है.... द दर्पण के सामने खड़ा है... जैसे दो जुड़वां एक हो अंडे में पैदा हुए बच्चे हैं। दोनों का स्रोत समझ का 'साली' है। दोनों की समझ बिल्कु एक है। भाषा हे थोड़ी लेकिन दोनों का यो कुल एक है। दोनों अलग-अलग बंद में, अलग-अलग राग में एक हो गीत को गुनगुना रहे हैं। इसलिए मैंने इसे "महागीता' कहा है। इसमें जरा भी नहीं है... यहां कोई प्रयास नहीं है। अष्टावक्र को कुछ नहीं पड़ रहा है। अष्टावक्र कहते है और उधर जनक का सिर हिलने लगता है। सहमति में दोनों के बीच बड़ा गहरा अंतरंग संबंध है, बड़ी गहन है। इधर गुरु बोला नहीं कि शिष्य
| Brand Name | Diamond Books |
| Manufacturer | Diamond Books |
| Item Type | Hinduism · Books |
| Shipping Weight | 390 g |
| Package Dimensions | 21.3 × 13.9 × 1.9 cm |
| Category | Books › Religion & Spirituality › Hinduism |
| Category Rank | #26,263 in Books |
| Marketplace Rating | 4.6 out of 5 (89 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9788189605803 |