
जगत का अपरतम संबंध: गुरु-शिष्य के बीच किसी गायक को गीत गाते देख कर तुम्हें याद आ जाती है अपने कंठ की कि कंठ तो मेरे पास भी है। और किसी नर्तक को नाचते देख कर तुम्हें याद आ जाती है अपने पैरों की कि पैर तो मेरे पास भी हैं, चाहूं तो नाच तो मैं भी सकता हूं। किसी चित्रकार को चित्र बनाते देख कर तुम्हें भी याद आ जाती है कि चाहूं तो चित्र मैं भी बना सकता हूं। ऐसे ही किसी बुद्ध को देख कर तुम्हें याद आ जाती है कि चाहूं तो बुद्धत्व मैं भी पा सकता हूं। ओशो इस पुस्तक में ओशो निम्नलिखित विषयों पर बोले हैं: मौन, प्रेम, आनंद, ध्यान, अकेलापन, क्रोध, स्वतंत्रता, मनोविज्ञान, मृत्यु, तृष्णा
| Brand Name | OSHO |
| Manufacturer | Osho Media International |
| Item Type | Spirituality · Books |
| Category | Books › Religion & Spirituality › Religious Studies › Spirituality |
| Category Rank | #37,987 in Books |
| Marketplace Rating | 4.5 out of 5 (8 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9788172613501 |



