
ब्रह्माण्डपुराणोक्त यह शाक्त साधना साहित्य श्रीमाता की वाङ्मयी मूर्ति मानी जाती है। श्री विद्योपासना की पारङ्गता में आने वाले सभी प्रत्यूहों की निवृत्ति के लिए ही इस ग्रन्थ का प्रकाशन किया जा रहा है। इसकी उपासना यन्त्रात्मक फलोपलब्धि के साथ-साथ साधक के मन और चेतना को उन्नत तथा हृदय को कोमल और उदार बनाती है। योग, भक्ति, ज्ञान एवं कर्म आदि समस्त साधना के सामञ्जस्य से सुशोभित यह साधना भारतीय आध्यात्मिक जगत की सर्वश्रेष्ठमयी गूढ़ साधना है। भगवती ललिता अनन्तस्वरूपा है। संस्कृत भाषा ज्ञान से वंचित जिज्ञासुओं के लिए श्रीललिता सहस्रनामावली में वर्णित ज्ञान दुर्लभ एवं दुस्तर है। भगवान वाल्मीकि ने धर्म के स्वरूप का निरूपण करते हुए कहा है- 'कृतेषु प्रतिकर्तव्य मेष धर्मः सनातन'। मैंने भी उसी सनातन धर्म का पालन करते हुए प्रस्तुत ग्रन्थ मूल संस्कृत का हिन्दी अनुवाद एवं व्याख्या अपने सुधी साधकों के लिए प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। श्री ललिता सहस्त्रनाम ग्रन्थ का हिन्दी में प्ररोचना मनोज कुमार शुक्ल ( दीक्षानाम आत्मानन्द) द्वारा किया गया। श्री शुक्ल का जन्म २० सितंबर १९७८ को ग्राम-अरई, पत्रालय-कटरा, जनपद संत रविदास नगर भदोही में स्व. माता अम्बर शुक्ल के घर हुआ। सम्प्रति श्री शुक्ल इलेक्ट्रानिक में आई.ई.टी. लखनऊ से बी. टेक हैं तथा वर्तमान में उत्तर रेलवे में वरिष्ठ खण्ड अभियन्ता (संकेत) प्रतापगढ़ के पद पर कार्यरत हैं। वे इस ग्रन्थ के प्रणयन का सम्पूर्ण श्रेय श्रीगुरु की महिमामयी कृपा को देते हैं। वे श्री गुरुकृपा को इस ग्रन्थ की समस्त क्रियाओं का मूल कारण मानते हैं।
| Brand Name | Pilgrims Publishing |
| Manufacturer | PILGRIMS PUBLISHING |
| Item Type | Hinduism · Books |
| Shipping Weight | 441 g |
| Package Dimensions | 22 × 14 × 2 cm |
| Category | Books › Religion & Spirituality › Hinduism |
| Category Rank | #37,244 in Books |
| Marketplace Rating | 4.7 out of 5 (89 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789350762066 |
| Attributes | Language Published: Hindi · Binding: Paper Back |