
यह ग्रन्थ स्वनामधन्य शंकर स्वामी की तिब्बत यात्रा का एक आभास मात्र कहा जा सकता है। उनकी यह यात्रा ऐसी अलौकिक तथा रहस्यमयी रही है, जिस पर सामान्य बुद्धि हठात् विश्वास नहीं कर सकती, तथापि जो तत्त्ववेत्ता हैं तथा रहस्यमयी घटनाओं से दो-चार हो चुके है, उनकी विमल प्रज्ञा में ऐसी घटनायें प्रकृति की ही एक लीला के रूप में मान्य एवं विश्वस्त रूप से प्रकट होती रहती है। उनको इस सम्बन्ध में कोई आश्चर्य तथा संशय का तनिक भी आभास नहीं होता। युग-युगान्तर से यह सब होता चला आया है, आगे भी होता रहेगा। प्रकृति की अनन्त क्रीड़ा में प्रतिक्षण ऐसे विस्मय तथा आश्चर्य का उन्मेष होता रहता है। इनको संशयात्मक दृष्टिकोण से न देख कर अनुसंधान तथा विज्ञान के अन्वेषक के रूप में देखना उचित होगा।
| Brand Name | Vishwavidyalaya Prakashan, Vns |
| Manufacturer | Vishwavidyalaya Prakashan, Vns |
| Item Type | Spirituality · Books |
| Shipping Weight | 100 g |
| Package Dimensions | 15 × 12 × 4 cm |
| Category | Books › Religion & Spirituality › Religious Studies › Spirituality |
| Category Rank | #23,774 in Books |
| Marketplace Rating | 4.3 out of 5 (322 ratings on the source marketplace) |
| EAN | 9789387643109 |
| Attributes | <br>Binding: paperback… |



